अध्याय 188

उसकी आँखों में अँधेरा उतर आया। “एक-दूसरे की मदद? बदले में कुछ चाहिए? दो बड़े लोग?”

मुझे समझ आ गया कि मुझसे गलत बात निकल गई है, लेकिन अब उसे वापस भी तो नहीं ले सकती थी। जब कह ही दिया था, तो आगे भी कह ही देती हूँ।

“क्या मैं गलत हूँ? यही तो होता है। मर्द-औरत के बीच, अगर हिसाब लगाएँ तो नुकसान तो मेरा ...

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